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Shuchi Healthcare Consultancy

आयुर्वेद अस्पताल और पंचकर्म क्लिनिक के लिए NABH: पूरी जानकारी (2026)

लेखक: डॉ. आशुतोष शर्मा · अपडेट: · 7 मिनट में पढ़ें

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आयुर्वेद संस्थानों के लिए NABH के चार रास्ते हैं: 10 या ज़्यादा बेड वाले अस्पताल के लिए पूर्ण AYUSH hospital accreditation, 5 या ज़्यादा बेड वाले अस्पताल के लिए entry-level AYUSH hospital certification, बिना बेड वाले क्लिनिक के लिए entry-level AYUSH centre certification, और 2 या ज़्यादा टेबल वाले पंचकर्म क्लिनिक के लिए Panchakarma clinic accreditation। NABH मान्यता इसलिए अहम है क्योंकि बीमा कंपनियाँ AYUSH इन-पेशेंट इलाज तब कवर करती हैं जब वह सरकारी AYUSH अस्पताल या QCI/NABH से मान्यता प्राप्त संस्थान में हुआ हो।

मुख्य बातें

  • 10+ बेड: पूर्ण AYUSH hospital accreditation, 10–50 बेड के लिए ₹20,000 आवेदन + ₹75,000 सालाना (ऊपर से GST)।
  • 5+ बेड: entry-level AYUSH hospital certification, 50 बेड तक दो साल के लिए ₹21,000। बिना बेड का क्लिनिक: AYUSH centre certification, दो साल के लिए ₹11,000।
  • 2+ टेबल वाला, बिना बेड का पंचकर्म क्लिनिक: Panchakarma clinic accreditation, 2–5 टेबल के लिए ₹5,000 + ₹25,000 सालाना।
  • NABH के नए Ayush Treatment and Wellness Centres (1st Edition) मानक 1 अप्रैल 2025 से लागू हैं और OPD या day-care देने वाले पंचकर्म क्लिनिकों पर भी लागू होते हैं।

आयुर्वेद संस्थानों के लिए चार रास्ते

आपका संस्थान NABH प्रोग्राम मुख्य शर्तें NABH फीस (+GST) चक्र
आयुर्वेद अस्पताल, 10+ बेड AYUSH hospital accreditation 6 महीने से चल रहा हो; 10+ स्वीकृत बेड ₹20,000 + ₹75,000 सालाना (10–50 बेड) 4 साल (नया 1st Edition)
आयुर्वेद अस्पताल, 5+ बेड Entry-level AYUSH hospital 5+ बेड; चौबीसों घंटे वैद्य, नर्सिंग/थेरेपिस्ट; अलग थेरेपी सेक्शन 50 बेड तक ₹21,000, दो साल के लिए 2 साल
आयुर्वेद क्लिनिक या day-care, बिना बेड Entry-level AYUSH centre स्वतंत्र क्लिनिक; कोई इन-पेशेंट सेवा नहीं ₹11,000, दो साल के लिए 2 साल
पंचकर्म क्लिनिक, बिना बेड Panchakarma clinic accreditation 6 महीने से चल रहा हो; 2+ पंचकर्म टेबल ₹5,000 + ₹25,000 सालाना (2–5 टेबल) 15–18 महीने में surveillance; तीसरे साल दोबारा आवेदन

फीस nabh.co की सूची के अनुसार है। NABH ने दिसंबर 2025 में Ayush की सालाना फीस और मार्च 2026 में entry-level Ayush फीस में बदलाव की घोषणा की थी, इसलिए भुगतान से पहले मौजूदा राशि ज़रूर जाँचें।

नए मानक: पुराने edition और 1st Edition

NABH का AYUSH अस्पताल प्रोग्राम 2009 से आयुष मंत्रालय के साथ चल रहा है और अब तक हर पद्धति के लिए अलग मानक थे; आयुर्वेद के लिए अप्रैल 2016 का 2nd Edition। अब NABH ने नए Accreditation Standards for Ayush Hospitals (1st Edition) जारी किए हैं, जो आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी और सोवा-रिग्पा, सभी पर एक समान लागू होते हैं। NABH की 27 मई 2026 की योजना (NABH/AYUSH/2026/05377) के अनुसार:

  • 1 अगस्त 2026 से सभी नए आवेदन नए मानकों पर जाँचे जाते हैं;
  • 31 जुलाई 2026 तक फीस जमा करने वाले आवेदन और उस तारीख तक किए गए renewal आवेदन पुराने या नए मानक चुन सकते थे;
  • 31 जुलाई 2026 के बाद पुराने मानकों पर कोई नया या renewal आवेदन नहीं लिया जाता;
  • मान्यता चार साल की होती है।

OPD और day-care वाले केंद्रों के लिए Ayush Treatment and Wellness Centres (ATWC), 1st Edition मानक 1 अप्रैल 2025 से लागू हैं। ये पंचकर्म क्लिनिकों पर भी लागू होते हैं। इनमें 10 अध्याय, 40 मानक और 141 objective elements हैं, और मान्यता चार साल की होती है। विस्तार हमारी ATWC गाइड में है (अंग्रेज़ी में)।

आपके लिए इसका मतलब: अभी आवेदन कर रहे हैं तो आपके दस्तावेज़ नए 1st Edition के हिसाब से लिखे जाने चाहिए। हम हर AYUSH प्रोजेक्ट में यही करते हैं।

कमाई पर असर: बीमा

आयुष मंत्रालय की बीमा उपभोक्ता गाइड (All India Institute of Ayurveda द्वारा प्रकाशित) IRDAI के नियमों का सार देती है:

  • AYUSH इन-पेशेंट इलाज तब कवर होता है जब वह सरकारी AYUSH अस्पताल या QCI/NABH से मान्यता प्राप्त संस्थान में हुआ हो।
  • बीमा के लिए स्वतंत्र AYUSH अस्पताल में कम से कम 5 इन-पेशेंट बेड, चौबीसों घंटे योग्य AYUSH चिकित्सक, अलग AYUSH थेरेपी सेक्शन और बीमा कंपनी को उपलब्ध दैनिक मरीज़ रिकॉर्ड होने चाहिए।

ध्यान दें कि NABH की entry-level AYUSH hospital की शर्तें बीमा की इस परिभाषा से मिलती-जुलती हैं। इसीलिए यह प्रमाणन अक्सर cashless tie-up का रास्ता खोल देता है। देखें TPA और बीमा empanelment।

NABH असेसर आयुर्वेद संस्थान में क्या देखते हैं

इलाज (clinical care)

  • हर थेरेपी का लिखित प्रोटोकॉल, जैसे स्नेहन, स्वेदन, वमन, विरेचन, बस्ति, नस्य, रक्तमोक्षण, शिरोधारा, क्षार सूत्र। हर प्रोटोकॉल में indications, contraindications, निगरानी और थेरेपी के बाद की देखभाल लिखी हो।
  • पहला आकलन, जिसमें आयुर्वेदिक निदान (प्रकृति, रोग-रोगी परीक्षा) के साथ vital signs और ज़रूरी आधुनिक जाँचें हों।
  • रोज़ के progress notes, थेरेपी रिकॉर्ड और discharge summary।

मरीज़ के अधिकार

  • हर थेरेपी के लिए अलग consent, मरीज़ की भाषा में और जोखिम साफ़ लिखे हों।
  • निजता का ध्यान, और थेरेपी के लिए मरीज़ के जेंडर के अनुसार थेरेपिस्ट।
  • खर्च का साफ़ अनुमान और शिकायत की व्यवस्था।

दवाएँ और फ़ार्मेसी

  • लाइसेंसशुदा निर्माताओं से ख़रीद, बैच और एक्सपायरी का रिकॉर्ड।
  • सही भंडारण और एक्सपायर्ड स्टॉक अलग रखना।
  • संस्थान में बनने वाले तेल और औषधियों के बैच रिकॉर्ड।

संक्रमण से बचाव

  • द्रोणी, स्टीम चेंबर, बस्ति और नस्य के उपकरणों की सफ़ाई।
  • तेल और लिनन का सही प्रबंधन, हाथों की स्वच्छता और biomedical waste का अलगाव।

सुरक्षा

  • crash cart और basic life support में प्रशिक्षित स्टाफ़।
  • आपात स्थिति के लिए किसी एलोपैथिक अस्पताल से रेफ़रल टाई-अप।
  • fire safety, लाइसेंस और biomedical waste authorisation समय पर नवीनीकृत।

स्टाफ़ और गुणवत्ता

  • वैद्यों और थेरेपिस्टों की योग्यता और ट्रेनिंग के रिकॉर्ड।
  • quality indicators, जैसे थेरेपी से जुड़ी प्रतिकूल घटनाएँ, मरीज़ों की संतुष्टि और दोबारा भर्ती, जिनकी समीक्षा हो और उन पर कार्रवाई हो।

15 बेड के आयुर्वेद अस्पताल के लिए 6 महीने की योजना

महीना काम
1 Gap analysis; लाइसेंस की जाँच; NABH से प्रोग्राम और edition की पुष्टि
1–2 थेरेपी प्रोटोकॉल, consent फ़ॉर्म, फ़ार्मेसी और संक्रमण नियंत्रण की प्रक्रियाएँ, रिकॉर्ड फ़ॉर्मेट
2–4 स्टाफ़ ट्रेनिंग; कमेटियाँ; quality indicators शुरू; ड्रिल (तीन महीने का implementation)
5 Internal audit और अंकों के साथ mock assessment; सुधार
5–6 ऑनलाइन आवेदन; desktop review; on-site असेसमेंट; non-conformities बंद करना

आयुर्वेद संस्थानों के आवेदन अक्सर कहाँ अटकते हैं

  • थेरेपी प्रोटोकॉल किताबों से कॉपी किए गए हों, अस्पताल के असली काम से मेल न खाते हों।
  • consent फ़ॉर्म सामान्य हों, हर थेरेपी के लिए अलग न हों।
  • संस्थान में दवा बनती हो पर बैच रिकॉर्ड न हो।
  • एलोपैथिक रेफ़रल की व्यवस्था या आपात ड्रिल का रिकॉर्ड न हो।
  • लाइसेंस खत्म हो चुके हों, ख़ासकर biomedical waste और fire।

AYUSH मान्यता हमारी ख़ास विशेषज्ञता है। अपने अस्पताल, क्लिनिक या पंचकर्म सेंटर के लिए मुफ़्त gap assessment के लिए हमें WhatsApp करें। पूरी प्रक्रिया हमारी NABH सर्टिफिकेट गाइड में भी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आयुर्वेद अस्पताल को कौन-सा NABH प्रोग्राम लेना चाहिए?

10 या ज़्यादा स्वीकृत बेड हों तो NABH AYUSH hospital accreditation। कम से कम 5 इन-पेशेंट बेड, चौबीसों घंटे योग्य वैद्य और नर्सिंग/थेरेपिस्ट, और अलग थेरेपी सेक्शन हों तो entry-level AYUSH hospital certification से जल्दी और कम खर्च में शुरुआत हो सकती है। बिना बेड वाले क्लिनिक AYUSH centre certification लें, और दो या ज़्यादा टेबल वाले पंचकर्म क्लिनिक Panchakarma clinic programme।

क्या NABH से आयुर्वेद इलाज का बीमा मिलने में मदद होती है?

हाँ। आयुष मंत्रालय की बीमा उपभोक्ता गाइड के अनुसार बीमा कंपनियाँ AYUSH इन-पेशेंट इलाज तब कवर करती हैं जब वह सरकारी AYUSH अस्पताल या QCI/NABH से मान्यता प्राप्त संस्थान में हुआ हो। बीमा के लिए AYUSH अस्पताल में कम से कम 5 इन-पेशेंट बेड और चौबीसों घंटे योग्य AYUSH चिकित्सक होना ज़रूरी माना जाता है।

आयुर्वेद अस्पताल को NABH में कितना समय लगता है?

NABH के नियम के अनुसार आवेदन से पहले तीन महीने तक मानक लागू करने होते हैं। हमारे अनुभव में entry-level AYUSH प्रमाणन में पहले gap analysis से 4 से 6 महीने और पूर्ण AYUSH hospital accreditation में 6 से 9 महीने लगते हैं।

आयुर्वेद अस्पतालों के लिए NABH के नए मानक कौन-से हैं?

NABH के नए Accreditation Standards for Ayush Hospitals (1st Edition) अब सभी AYUSH पद्धतियों (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी और सोवा-रिग्पा) के लिए एक ही मानक हैं। NABH की 27 मई 2026 की implementation योजना (NABH/AYUSH/2026/05377) के अनुसार 1 अगस्त 2026 से नए आवेदन इन्हीं मानकों पर जाँचे जाते हैं और मान्यता चार साल की होती है। आयुर्वेद के लिए ये अप्रैल 2016 के 2nd Edition की जगह लेते हैं।

मेरे पंचकर्म सेंटर में भर्ती के बेड हैं। कौन-सा प्रोग्राम लागू होगा?

Panchakarma clinic programme बिना स्वीकृत बेड वाले संस्थानों के लिए है। अगर आप मरीज़ भर्ती करते हैं तो आप AYUSH अस्पताल हैं: 10 या ज़्यादा बेड हों तो AYUSH hospital accreditation, कम से कम 5 बेड हों तो entry-level AYUSH hospital certification।

पंचकर्म क्लिनिक की NABH फीस कितनी है?

NABH की सूची के अनुसार 2–5 टेबल के लिए ₹5,000 आवेदन और ₹25,000 सालाना, 6–10 टेबल के लिए ₹10,000 और ₹30,000, और 10 से ज़्यादा टेबल के लिए ₹10,000 और ₹40,000, ऊपर से 18% GST।

आधिकारिक स्रोत

फीस और नियम बदलते रहते हैं। आवेदन से पहले आधिकारिक पेज पर ज़रूर पुष्टि करें।

अपने संस्थान का मुफ़्त gap assessment करवाएँ

हमें अपने संस्थान का प्रकार, बेड या चेयर की संख्या और शहर बताइए। डॉ. आशुतोष शर्मा बताएँगे कि कौन-सा NABH प्रोग्राम आपके लिए सही है, कितना खर्च आएगा और असल में कितना समय लगेगा — कोई भी फ़ैसला लेने से पहले।

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